Pehchan Faridabad
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जनता की कारस्तानी छीन रही हैं शहर की साँसे : मैं हूँ फरीदाबाद

नमस्कार! मैं फरीदाबाद आप सभी का इस्तकबाल करता हूँ। आज मैं आपके समक्ष अपनी खूबसूरती का वर्णन करने के लिए हाजिर हुआ हूँ। मैंने कभी भी खुदको तराशने की कोशिश नहीं की क्यों की मेरी आवाम ही मेरे नूर को रौशन कर रही है। मेरी जनता मेरा ध्यान रखना जानती है।

कहाँ और कितनी मात्रा में कूड़ा फैलाना है, कैसे प्रदूषण को बढ़ाना है, कैसे महामारी के दौर में सामाजिक दूरी का मजाक बनाना है। यह सब कुछ मेरे प्रिय फरीदाबाद वासी बखूबी जानते हैं। अरे क्या हुआ? मेरे शब्द चुभ रहे हैं आपको, मैं तो आप सभी की तारीफ के कसीदे पढ़ रहा है हूँ, फिर इसमें क्रंदन कैसा?

जानता हूँ कि अब आपका जवाब होगा की यह सब कुछ सरकार की बदौलत हो रहा है। पर मेरे दोस्त यह सत्य नहीं, सच तो यह है कि अगर आज मैं दयनीय स्थिति में हूँ तो इसका एक बहुत बड़ा कारण आप लोग हैं। जानना चाहते हैं कैसे? अभी कुछ दिन पूर्व ही स्वच्छता पखवाड़े की दुहाई देते हुए राज्य सरकार ने एक कानून बनाया जो कहता है कि अगर किसी ने भी सड़क किनारे कूड़ा जलाया तो उस व्यक्ति को 5 हजार रुपयों का जुर्माना भरना होगा।

पर एक कहावत तो आपने भी सुनी होगी कि कुत्ते कि दुम कभी सीधी नहीं होती और यही हाल है फरीदाबाद की आवाम का। कल ही मेरे प्रांगण में बह रही नहर के पास मैंने कूड़े के अम्बार को जलते हुए देखा। उससे निकलता हुआ धुआं मेरा दम घोंट रहा था। मैं कहाँ जाता, किसे बताता अपनी परेशानी के बारे में? वैसे भी यह परेशानी कोई नई बात तो नहीं मैं तो रोज इसे झेलता हूँ।

ग्रेटर फरीदाबाद की प्राचीर पर बसे एक गैराज वाला अपनी दुकान का कूड़ा सड़क किनारे इकठ्ठा कर उसे जला देता है। पूछने पर कहता है कि यह जगह उसकी है, पर उस नादान को कौन समझाए कि यह जगह किसी की नहीं है। आप सब मेरी आयु को घटा रहे हो।

अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन भी दूर नहीं जब मैं मृत्यु शैया पर विद्यमान हो जाऊँगा। समझना जरूरी है कि हर बार सरकार को दोष देकर कुछ नहीं होगा। हाँ जानता हूँ कि मेरा संरक्षण सरकार का कर्तव्य है। पर आपका मेरे प्रति कोई दाइत्व नहीं? जरा सोचिए कि मैं नहीं तो आप भी नहीं।

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