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प्रपंच या यथार्थ : किसान आंदोलन की घोषणा होते ही दुष्यंत हुए अंडरग्राउंड

कल अचानक हरियाणा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने एक वीडियो जारी करते हुए बताया की उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है और उन्होंने खुद को आइसोलेट किया है और उन सभी लोगो से विनती की है की कुछ समय से जो भी उनके सम्पर्क में आये है

वो एक बार अपनी जांच जरूर कराये। हालाँकि उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया की उनको किसी भी तरह के लक्षण नजर नहीं आ रहे थे पर फिर भी उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है उसको ध्यान में रखते हुए उन्होंने खुद को आइसोलेट किया है।

वही कल मंगलवार को कृषि विधयेक कानून को लेकर सैकड़ो किसान सिरसा पहुंचे और विरोध के साथ डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और बिजली मंत्री रणजीत सिंह के घर का भी घेराव करना था लेकिन बात उपमुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर थी तो डिप्टी सीएम के आवास के बाहर कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए और भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात था, दोनों मंत्रियो के आवास के करीब 100 मीटर की दुरी पर बैरिकेड्स लगा रखे थे।

इन बैरिकेड्स को ताड़ने के लिए कुछ लोगो ने प्रयास किया है लेकिन पुलिस ने इनको रोक दिया इसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों से किसानों को खदेड़ा। दो बार किसानों पर आंसूगैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। करीब दो घंटे तक हंगामे के बाद भी किसान भूमणशाह चौक से नहीं हटे।

मंत्रियों के आवास तक पहुंच अपनी बात रखने की मांग पर अड़े किसानों ने रात को चौक पर ही धरना लगा दिया। उनके लिए वहीं सेवादारों ने लंगर की भी व्यवस्था की। किसानों का नेतृत्व कर रहे किसान मंच के नेता प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि जिन्होंने बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास किया, वे किसान नहीं हैं। ये शरारती लोग हैं।

किसानो द्वारा उपमुख्यमंत्री आवास को घेरा गया और वही हरियणा में इस समय राहुल की किसान बचाओ यात्रा भी पुरे जोर पर है और इस समय दुष्यंत की बीमारी का सामने आना सवाल खडा करता है की क्या दुष्यंत किसी भी प्रकार की ब्यानबाज़ी से बचना चाहते है

या फिर यह कहे की गठबंधन की सरकार के कारण उन्हें यह डर सता रहा है की आने वाले में समय में राजनीती का ऊंट किस और बैठेगा इस लिए उन्होंने खुद को महफ़ूज़ करते हए यह फैसला लिया है लेकिन हम इस बात की पुष्टि करना मुश्किल है।

हालाँकि इस बात की पुष्टि आने वाले समय बताएगा की क्या सच है या क्या झूठ पर अभी यह समय प्रदेश में होने वाले आंदोलन से निज़ाद पाने का है

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