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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला Lock-Down के दौरान वसूली राशि वापस करे स्कूल

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को लॉकडाउन के दौरान छात्रों से फीस वसूली में कोई राहत नहीं दी है। हाईकोर्ट की डबल बैंच का निर्णय है कि लॉकडाउन के दौरान जिन स्कूलों ने अपने छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान की है, केवल वे ही ट्यूशन फीस लेने के हकदार हैं तथा उन्हें अपने टीचर्स का वेतन भी पूरा देना होगा।

इसके अलावा छात्रों से निजी स्कूल न तो मासिक शुल्क, न ही वार्षिक शुल्क और डेवलपमेंट शुल्क सहित ट्रांसपोर्ट शुल्क नहीं लेंगे। सभी स्कूल अपने जिला शिक्षाधिकारी को अपने स्कूल के बैंक खाते का विवरण दिखाएंगे ताकि यह साफ हो सके कि स्कूल प्रबंधकों ने ट्यृूशन फीसद से ज्यादा कुछ नहीं लिया। यदि स्कूल के बैंक खाते में छात्रों से ट्यूशन फीस के अलावा भी कुछ लिया है तो उसे स्कूल प्रबंधकों को वापस या ट्यूशन फीस में समायोजित करना होगा।

-क्या है पूरा मामला

23 मार्च 2020 से लागू हुए लॉकडाउन की अवधि के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर यह सरकारी निर्णय हुआ था कि स्कूल प्रबंधक छात्रों से कोई फीस नहीं वसूलेंगे। इसके खिलाफ पंजाब और हरियाणा के स्कूल संघों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की तो 30 जून 2020 काे हाईकोर्ट के सिंगल बैंच के जज ने यह निर्णय दिया कि लाकडाउन की अवधि में ऑनलाइन शिक्षा देने वाले स्कूल ही ट्यूशन फीस वसूल सकेंगे।

शिक्षकों का वेतन स्कूलों को पूरा देना होगा। इस निर्णय के खिलाफ स्कूल संघ हाईकोर्ट की डबल बैंच गए तो वहां से भी एक अक्टूबर 2020 को यही निर्णय आया कि सिंगल बैंच का निर्णय सही है। यानी वे ही निजी स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकेंगे जिन्होंने लाकडाउन के दौरान बच्चों को आनलाइन शिक्षा दी है। इसके अलावा शिक्षकों को पूरा वेतन दिया जाएगा। इसके बाद पंजाब के स्कूल संघ ने हाईकोर्ट के इस निर्णय पर पुनर्विचार याचिका दायर की तो 9 अक्टूबर 2020 को हाईकोर्ट ने निजी स्कूल प्रबंधकों की याचिका खारिज कर दी।

अब निजी स्कूल प्रबंधकों के समक्ष सिर्फ यही विकल्प है कि वे सिर्फ ट्यूशन फीस पर ही अपने बच्चों को आनलाइन शिक्षा दें और इसके अलावा कोई फीस वसूल नहीं करें। यदि किसी ने कोई अतिरिक्त फीस ले ली है तो उसे छात्र के अभिभावकों को वापस कर दें।

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