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धड़ल्ले से चलता रहा निर्माण कार्य और कुंभकरण की नींद सोती रही नगर निगम के 40 टीमें

आपने वो कहावत तो जरूर सुनी होगी कि हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ और होते हैं। यह कहावत नगर निगम की टीम पर सार्थक होती है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एनसीआर में बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने के लिए गुरुवार से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान शुरू किया हुआ था,

लेकिन पहले ही दिन धरातल पर इसे लेकर कोई भी जागरूक दिखाई नहीं दिया और रही बात कहावत की तो हमने यहां यह बात इसलिए बोली है क्योंकि भले ही प्रशासन द्वारा योजनाएं तो बनाई जाती है परंतु उन्हें अमल में बिल्कुल भी नहीं लाया जाता है। आपको बता दें नगर निगम प्रशासन द्वारा 40 टीमें बनाई गई थी लेकिन धरातल पर एक भी टीम मौजूद नहीं दिखी। ना ही किसी भी टीम द्वारा एक व्यक्ति का चालान तक काटा गया।

आपको बताते चलें निर्माण सामग्री को खुले में ना रखने के आदेश दिए गए थे लेकिन सामग्री अभी खुले में रखी हुई थी और कार्य भी धड़ल्ले से किया जा रहा था। वहीं इसके अतिरिक्त अलावा कंस्ट्रक्शन साइट पर पानी का छिड़काव व निर्माण सामाग्री को ढक कर रखने के भी आदेश हैं लेकिन कहीं इन पर अमल होते नहीं दिखा।

आने वाले समय में प्रदूषण का स्तर और भी ज्यादा बढ़ने का अंदेशा है। एनबीटी ने शहर के कई हिस्सों में जाकर देखा कि कंस्ट्रक्शन वेस्ट कहां पड़ा है और निर्माण सामग्री को लेकर एनजीटी के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

प्रदूषण फैलाने में वेस्ट मटेरियल और धूल निभाता है अपनी अहम भूमिका

शहर में अलग-अलग जगहों पर लगे मॉनिटरिंग स्टेशन में एक्यूआई का ग्राफ 300 के पार है, फिर भी स्थानीय प्रशासन बढ़ रहे वायु प्रदूषण को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है। सबसे ज्यादा प्रदूषण वेस्ट मैटेरियल और धूल से होता है। इस वक्त शहर के अलग अलग हिस्सों में सबसे ज्यादा कंस्ट्रक्शन वेस्ट बिखरा पड़ा है।

बाईपास रोड पर सेक्टर 37 के सामने, सेक्टर 16-17 के सामने काफी मात्रा में कंस्ट्रक्शन वेस्ट बिखरा हुआ है। इस वेस्ट को उठाने की जिम्मेवारी नगर निगम प्रशासन की है लेकिन निगम की टीम गुरुवार को कहीं पर भी नजर नहीं आई। इसी तरह एनआईटी पांच नंबर, सेक्टर 22-23 रोड किनारे, बड़खल विधानसभा क्षेत्र के अंदर प्रमुख सड़कों के किनारे कंस्ट्रक्शन वेस्ट दिखाई दिया।

हवा में उड़ती रहे धूल और धूल फांक रही थी नगर निगम की टीम

नगर निगम कमिश्नर ने जिन 40 टीमों की ड्यूटी प्रदूषण को रोकने के लिए लगाई है उसका एक काम ये भी है कि वह निर्माण सामग्री और साइट दोनो पर नजर रखे। क्योंकि एनजीटी के नियमों को देखा जाए तो साफ तौर पर आदेश है कि निर्माण सामग्री खुले में न रखी हो। वहीं निर्माण साइट पर भी हर एक घंटे बाद पानी का छिड़काव होना चाहिए ताकि सामग्री हवा में न उड़े।

शहर की कंस्ट्रक्शन साइटों पर ऐसा कहीं नहीं दिखाई दिया। एनआईटी में बन रहे बस अड्ढे व क्रिकेट स्टेडियम के बाहर भी पानी का छिड़काव नहीं दिखा। कंस्ट्रक्शन साइट के अंदर भारी ट्रक धूल उड़ाते नजर आए। इसी तरह से एनआईटी पांच नंबर के अंदर काफी मात्रा में निर्माण कार्य चल रहा है। लोग कमर्शल साइट बना रहे हैं जहां पर निर्माण सामग्री खुले में पड़ी हुई है। इनको लेकर टीम को चालान काटना चाहिए लेकिन 40 टीमों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

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