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मां बेटे ने पेश की मिसाल, सुराही बना कर दिया हिंदू मुस्लिम एकता का संदेश

मानने को तो धर्म में फर्क बहुत है पर फर्क की भावना से ऊपर उठकर समझें तो सभी धर्म प्रेम और प्यार का ही संदेश देते हैं। 52 वर्षीय एक महिला ने अपने बेटे के साथ कुछ ऐसी ही रचना को जन्म दिया जिसने मेक इन इंडिया के साथ हिंदू मुस्लिम एकता को बरकरार रखने का संदेश समाज तक पहुंचाया। गांव मोहना की रहने वाली हस्तशिल्प कला के बेहतरीन काम करने वाली धर्मवती अपने [पति दया राम और बेटा लक्ष्मण इन दिनों खूब कमाल कर रहे हैं।

यूं तो मिट्टी के बर्तन बनाने व बेचने का कारोबार करने वाला यह परिवार अपनी रोजी रोटी के लिए कड़ी मेहनत करता है पर इनकी कृतियों का कुछ ऐसा जादू है कि यह परिवार एक दो नहीं बल्कि कई बार अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इनके द्वारा बनाई जाने वाली कृतियों की सराहना देश विदेश में की जाती है और यही कारण है किधर मवती और उनका बेटा लक्ष्मण 21 बार अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किए जा चुके हैं।

धर्मवती द्वारा बनाई गई मिट्टी की बेहतरीन डिजाइनर सुराही एक नया और अद्भुत उदाहरण पेश कर रही है। हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक और मेक इन इंडिया का संदेश देने वाली यह सुराही बड़े-बड़े कलाकारों को भी अचंभे में डालने वाली है। धर्मवती की कृतियां उनके पुश्तैनी होना की भी देन है पीढ़ी दर पीढ़ी मिट्टी की कृतियां बनाने में एक के बाद एक परिवार के सदस्य नजीर पेश कर रहे हैं।

धर्मवती और उनके पति दयाराम 1989 से जिला ग्रामीण विकास अभिकरण से जुड़े हुए हैं। धर्मवती के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाना खाने का सेवन करना शुद्ध व पौष्टिक होता है। इतना ही नहीं कई बीमारियों और रोगों से लड़ने की रोगप्रतिकारक शक्ति भी इन बर्तनों मैं खाना बनाने व खाने से प्राप्त की जा सकती है। धर्मवती को अपनी इस कला के लिए अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से थाईलैंड में सम्मानित किया गया था जहां अनेकों संस्थाएं भी समारोह का हिस्सा बनी थी।

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