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लापरवाह जनता और बेपरवाह अधिकारी, क्षेत्र में तांडव कर रही है महामारी : मैं हूँ फरीदाबाद

नमस्कार! मैं हूँ फरीदाबाद और आज आप सभी को एक शब्द के मायने समझाने आया हूँ। शब्द है ‘ओवरस्मार्ट’ जो आपने कई बार अंग्रेजी भाषियों को कहते हुए सुना होगा। खैर आज मैं आपको इस शब्द का मतलब उदहारण के साथ समझाने आया हूँ।

ओवरस्मार्ट का मतलब अगर आपको शब्दों में समझना है तो बस यह जान लीजिये कि यह वो व्यक्ति होता है जो खुदको सबसे अव्वल और समझदार समझता है। उदहारण के तौर पर फरीदाबाद में काम करने वाले कुछ सरकारी अधिकारी जो जगह जगह बंटे हुए हैं।

कुछ सरकारी बैंक में काम कर रहे हैं, कुछ नगर निगम में कार्यरत हैं और कुछ इधर उधर सरकारी दफ्तरों में देखे जा सकते हैं। अब इन कर्मचारियों के बारे में सबसे ख़ास है इनका आत्मविश्वास जो स्वयं त्रिदेव से बड़ा है। आप अगर किसी सरकारी कार्यालय में जाएंगे तो आपको इनकी बदतमीज़ी का शिकार होना पड़ सकता है।

खैर अहम मुद्दा यह नहीं है मैं तो आज आप सभी को इन सरकारी दफ्तरों के अंदर का राज बताने आया हूँ। सरकारी कर्मचारी बड़ी बेबाकी से अपने काम का ब्यौरा दे देते हैं पर क्या वो नियम निर्देशों का पालन कर पा रहे हैं ? एक नियम जो कहता है कि दो गज की दूरी है जरूरी उसकी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।

दूसरा नियम जो कहता है कि मास्क लगाना अनिवार्य है उसकी भी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। एक बिमारी जिसने पूरे विश्व में त्राहिमाम मचा रखा है उस बिमारी का भी मजाक बनाया जा रहा है। ऐसे लोगों को ही ओवरस्मार्ट कहा जाता है जो एक पढ़ने लिखने के बाद भी ऐसी हरकतों को अंजाम दे रहे हैं।

कुछ दिन पूर्व नगर निगम कार्यालय में अफसरों को बिमारी का मजाक बनाते देखा जा चुका। हैरान करने योग्य बात यह है कि अब भी सरकारी कर्मचारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। बिन मास्क लगाए सरकारी दफ्तरों में काम किया जा रहा है और सामाजिक दूरी की तिलांजलि दी जा रही है।

पर कब तक इस तरीके से काम चलता रहेगा ? क्या पढ़े लिखे सरकारी कर्मचारियों के लिए यह समझना मुश्किल है कि बिमारी के संक्रमण को कम करना है तो नियमों का पालन करना जरूरी है।

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