Pehchan Faridabad
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ठंड में फुटपाथ पर जीवन निर्वाह करते हैं गरीब और चाय की चुस्कियां लेता है प्रशासन : मैं हूँ फरीदाबाद

नमस्कार! मैं फरीदाबाद आज इस क्षेत्र की कार्य प्रणाली के आगे एक फ़रियाद लेकर उतरा हूँ। मैं क्षेत्र में रहने वाले तमाम आला मंत्रियों, अधिकारियों से एक विनती करना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ की आप मेरी जमीन को भट्टी की तरह गर्म कर दें। क्या हुआ ? आपको मेरी मांग अजीब लगी ? पर मैं क्या करूँ मेरी इस मांग में मेरे कुछ ‘अपनों’ का हित छुपा हुआ है।

मेरे यह ‘अपने’ वहीं लोग हैं जिनका इस समाज ने तिरस्कार कर रखा है। न इनके पास सर ढकने के लिए कोई ठिकाना है ना ही खाने के लिए दो वक्त की रोटी। ये बिचारे तो मेरी गलियों, फुटपाथ और चौराहों पर आश्रित हैं। तभी तो कहता हूँ कि मेरी इस जमीन को भट्टी सा ताप दो ताकि ठंड में इन बिचारों को कुछ आराम मिल जाए।

जब ये मेरी ठंडी जमीन पर लेटते हैं तो इनका शरीर इनको काटने के लिए दौड़ता है। कुछ तो सोचो इनके बारे में ? मैं जानता हूँ कि आप क्या सोच रहे हैं, कि अगर कुछ माँगना ही था तो इन गरीबों के लिए एक बसेरा ही मांग लेता। पर मैं अब और जुमलों को सहन करने की क्षमता नहीं रखता।

यह प्रशासन को कई सालों से बसेरा निर्माण में जुटा हुआ है पर अभी तक इन बेसहारा लोगों के हाथ खाली हैं। राजनीति की रोटियां सेकना तो हर कोई जानता है पर उपकार करना हर किसी के बस की बात नहीं। कभी देखा रात में एक फुटपाथ पर क्या मंज़र छाया होता है?

ठंड से कांपते गरीब किस तरह अपना जीवन निर्वाह कर रहे होते हैं ? नहीं, ये नहीं देखा होगा प्रशासन ने क्योंकि तमाम नेतागण तो अपने घर भरने में मसरूफ हैं। बात रही रैन बसेरे के निर्माण कार्य में जुटे नगर निगम की तो जिस महकमे की खुद की रीड टूटी हुई हो वो दूसरा भवन कैसे बनवा सकता है।

इसलिए मैं तो बस अब यही अनुरोध कर सकता हूँ कि जमीन को ही ताप दीजिये शायद कुछ फायदा जाए। पर मैं जानता हूँ कि हर परेशानी का एक दायरा होता है और जब वो दायरा बढ़ता है तो एक आम इंसान प्रचंड होने में समय नहीं लगाता। उम्मीद है की यह मूक बधिर जल्द जागेगा।

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