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रात पर क्यों हो सिर्फ पुरुषों का अधिकार? मिलिए इन महिला बाउंसर्स से

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हमारे देश में महिलाओं को काफी कमजोर माना जाता है। ऐसी सोच के साथ के महिलाओं को देखा जाता है कि यह बस कुछ ही कामों के लिए बनी हैं। लेकिन अब यह सोच महिलाएं बदल रही हैं। ऐसी ही कहानी है पुणे की दीपा परब की, जिन्होंने समाज के नियमों और सोच के अनुसार न चलकर अपने लिए एक अलग पहचान बनाई है। रणरागिनी दीपा द्वारा बनाया गया देश का पहला महिला बाउंसर ग्रुप है, जो लोगों की सुरक्षा का ज़िम्मा उठाए हुए है।

रसोई तक सीमित नहीं है महिलाएं अब। हर क्षेत्र में अब महिलाएं आगे हैं। ऐसे ही दीपा हमेशा से अपने लिए एक करियर का निर्माण करना चाहती थीं। लेकिन समाज और खुद के परिवार से उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली।

रात पर क्यों हो सिर्फ पुरुषों का अधिकार? मिलिए इन महिला बाउंसर्स से

अगर आपको लगता है कि बाउंसर सिर्फ मर्द ही बन सकता है तो आपकी यह सोच गलत है। दीपा वो दिन नहीं भूलतीं, जब उनकी आँखों के सामने पुलिस में भर्ती का फार्म फाड़ दिया गया था। वे पुलिस कॉन्स्टेबल बनना चाहती थीं और किरण बेदी, इंदिरा गाँधी जैसी महान महिलाओं के नक़्शे कदम पर चल कर समाज में बदलाव लाना चाहती थीं। लेकिन उन्हें इसका मौका नहीं मिला।

रात पर क्यों हो सिर्फ पुरुषों का अधिकार? मिलिए इन महिला बाउंसर्स से

पुणे की नाइटलाइफ काफी फेमस है। यह देश भर में मशहूर है। यहां के क्लब्स में आने वालों में, युवकों के साथ युवतियों की संख्या भी अच्छी खासी होती है। ऐसे में क्लब और होटल्स में देर रात तक इन युवतियों की सुरक्षा एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है, जिसे महिला बाउंसर बखूबी निभा रही हैं। दीपा परब अपना घर चलाने के लिए अपने पति के बिज़नस में हाथ भी बटातीं हैं।

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महिलाओं को जो कमज़ोर समझते हैं उन्हें इनसे कुछ सीख लेनी चाहिए। महिलाएं सबसे अधिक ताकतवर होती हैं। महिलाओं का प्रभाव हर दिन दुनिया में बढ़ता जा रहा है।

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