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जबरन धर्म परिवर्तन के कारण मेवात जिले में खौफ के साए में जीने को मजबूर महिलाए

हरियाणा के मेवात में हिन्दुओं और दलितों पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए एक जांच कमेटी निर्धारित की गई थी। जिसका नेतृत्व कर रहे पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार ने आज कहा कि पाकिस्तान और मेवात के बीच कोई अंतर नहीं है।

उन्होंने गुरुग्राम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पवन कुमार ने कहा कि हरियाणा का मेवात दलितों का कब्रिस्तान बन रहा है और इस क्षेत्र में महिलाओं के अपहरण, बलात्कार और जबरन धर्म परिवर्तन की कई खबरें आती हैं।

उन्होने कहा कि दलीतों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का हवाला देते हुए हरियाणा के श्री वाल्मीकि महासभा ने न्यायमूर्ति पवन कुमार की अगुवाई में एक 4 सदस्यीय समिति का गठन करने का फैसला किया था, ताकि दलितों पर हो रहे अत्याचारों की वास्तविकता सामने लाई जा सके।

इस पर पूर्व न्यायमूर्ति पवन कुमार के अलावा, सुल्तान वाल्मीकि (वाल्मीकि महापंचायत हरियाणा के अध्यक्ष), कन्हैया लाल आर्य (उपाध्यक्ष आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा) और देवदत्त शर्मा (अध्यक्ष बार एसोसिएशन सोहना) को श्री वाल्मीकि द्वारा गठित जाँच दल का सदस्य नियुक्त किया गया।

इस पर टीम ने दावा किया कि पीड़ितों के बीच इस्लामवादियों का खौफ और डर इस कदर है कि दलित समाज के 48 पीड़ितों में से केवल 19 पीड़ितों ने उन पर की गई क्रूरता के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराई गई है।

टीम के निष्कर्षों से पता चला कि लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ मेवात भर में व्यापक हो गई है जिसके कारण लड़कियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में समस्या हो रही है।

इसके अलावा फ्रीजपुर नामक से एक उदाहरण का भी हवाला दिया गया। जहां 9 मुस्लिमों ने एक महिला का जबरन अपहरण करने के बाद कई दिनों तक उसके साथ बलात्कार किया। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और अपहरणकर्ताओं ने चार दिन बाद महिला की हत्या कर दी।

वहीं जबरन धर्मांतरण के 200 से अधिक मामले क्षेत्र में कथित रूप से हुए हैं यह जानकर टीम के पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार द्वारा दी गई। समिति ने यह भी कहा कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण, अपराधियों को छोड़ दिया गया है और उन लोगों के परिवार के सदस्यों पर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला जा रहा है।

समिति के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति पवन कुमार ने कहा कि उक्त रिपोर्ट हरियाणा के मुख्यमंत्री, भारत के अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष और भारत के गृह मंत्री को भी भेजी जाएगी, ताकि उक्त पीड़ितों को न्याय दिया जा सके।

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