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अमेरिका में दंगाइयों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा को पहुंचाया नुकसान

अमेरिका से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के बाहर महात्मा गांधी की प्रतिमा को ब्लैक लाइव्स मैटर प्रदर्शनकारियों के अनियंत्रित तत्वों द्वारा जान- बुचकर नुकसान पहुंचाया गया । एएनआई के एक अपडेट के मुताबिक, यूनाइटेड स्टेट्स पार्क पुलिस ने जांच शुरू की है।

इस मामले पर अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के बाहर महात्मा गांधी की प्रतिमा पिछले कुछ दिनों में शहर में फैले #blacklivesmatter विरोध के शरारती तत्वों के द्वारा असुरक्षित महसूस कर रही है |

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद पूरे अमेरिका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अभियोजकों ने मामले में बुधवार को तीन और पुलिस अधिकारियों को आरोपित किया और मामले के केंद्र में अधिकारी के खिलाफ एक नया, कठिन आरोप दायर किया, प्रदर्शनकारियों को जीत दिलाई जिन्होंने पुलिस क्रूरता और नस्लीय अन्याय से लड़ने के लिए तट से तट तक सड़कों को भर दिया है।

डेरेक चौविन के खिलाफ सबसे गंभीर आरोप लगाया गया , जो फ्लोयड की गर्दन पर अपना घुटने दबाते हुए वीडियो में देखा गया था और अब दूसरी डिग्री की हत्या के आरोप के खिलाफ खुद का बचाव करना चाहिए। दृश्य में तीन अन्य अधिकारियों पर पहली बार सहायता करने और दूसरी डिग्री की हत्या और दूसरी डिग्री की हत्या करने के आरोप लगाए गए थे।

अमेरिका में अफ्रीकी मूल के नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है | अमेरिका के कई हिस्सों में नस्लभेद के खिलाफ लोग हफ्तेभर से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं | अमेरिका में हो रहे प्रदर्शनों को मद्देनजर रखते हुए बहुत से शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है | . कर्फ्यू को रात में होने वाली हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए लगाया गया है |

क्या है जॉर्ज फ्लॉयड की मौत का मामला – 26 मई को अमेरिका के मिनेपोलिस शहर में पुलिस ने एक दुकानदार से धोखाधड़ी के आरोप में फ्लॉयड को गिरफ्तार किया था | एक पुलिस वाले ने सड़क पर अपने घुटने से फ्लॉयड की गर्दन को करीब आठ मिनट तक दबाए रखा जबकि मामला बस नकली नोट देने का था |

जॉर्ज लगातार पुलिस अफसर से घुटना हटाने की गुहार लगा रहे थे लेकिन पुलिस ऑफिसर ने दया नहीं दिखाई | धीरे-धीरे फ्लॉयड की साँसे बंद हो गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई | वह बार-बार बोल रहे थे आई कैंट ब्रीथ मतलब वह साँस नहीं ले पा रहे हैं |

महाशक्ति अमेरिका कोरोना का प्रहार तो झेल ही रहा था लेकिन, जॉर्ज फ्लॉयड के मामले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है | जैसे हिंसक प्रदर्शन अमेरिका देख रहा है वैसे गत 72 वर्षों में उसने कभी नहीं देखे |

नक्सलवाद का मुद्दा हमेशा से अमेरिका में चरम पर रहा है फ्लॉयड की मौत के बाद यह कहना गलत नहीं होगा की उसकी छवि दुनिया के सामने ख़राब हो रही है | ट्रंप ने फ्लॉयड के हत्यारे पुलिस वाले को कड़ी सजा देने की बात कही है लेकिन दुनिया जानती है वह किस प्रकार के व्यक्ति हैं | ट्रंप श्वेतों के वोट पाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे |

ओम सेठी

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