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स्कूलों खोलना जरूरी है, हम हमेशा के लिए घर नहीं बैठ सकते: हरियाणा शिक्षा मंत्री

वर्तमान में पूरा देश कोरोना रूपी वैश्विक महामारी के दौर से गुजर रहा है जो अभी तक भारत में लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है और हजारों जान इस वायरस के चलते अभी तक देश जा चुकी है। जब यह महामारी भारत में दाखिल हुई थी तो केंद्र सरकार द्वारा इस पर नियंत्रण करने के लिए देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा की गई थी।

लेकिन जब लॉक डाउन के कारण देश आर्थिक रूप से पटरी से उतरने लगा तो केंद्र सरकार द्वारा वापस से देश को सामान्य स्थिति की ओर ले जाने के प्रयास के चलते लॉक डाउन के चार चरणों के बाद अनलॉक वन की घोषणा की गई।

इसके तहत केंद्र सरकार सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर देश को वापस से सामान्य गतिविधियों की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है। इसी के चलते हरियाणा प्रदेश के शिक्षा मंत्री कंवर पाल द्वारा सूबे में स्कूलों को खोले जाने के संकेत दिए गए हैं।

उनका कहना है कि इस महामारी के डर के कारण हमेशा के लिए स्कूल बंद नहीं किए जा सकते इसलिए आवश्यकता है कि जल्द से जल्द स्कूलों को भी वापस से खोला जाए ताकि छात्र अपने पाठ्यक्रम को समय से पूरा कर सके।

वही कोरोना की मौजूदगी को लेकर उन्होंने कहा कि जब तक इसकी वैक्सीन की खोज नहीं हो जाती दुनिया को इस महामारी को साथ लेकर ही आगे बढ़ना होगा और धीरे धीरे अपने सामान्य जीवन की और वापिस लौटना होगा।
 
मंत्री कंवर पाल का कहना है कि कोरोना का डर सबको है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हमेशा के लिए अपने घरों में बंद हो जाए। क्योंकि अभी यह नहीं कह सकते कि कोरोना का प्रकोप कब तक रहेगा और कब इसका समधान देखने को मिलेगा।

इसलिए हम सभी को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई सुरक्षा उपाय को अपनाते हुए आवश्यक सावधानियां बरतते हुए स्कूलों को खोलने का कार्य भी शुरू करना होगा और जुलाई से प्रदेश के स्कूलों को वापिस से सुचारू रूप से खोलने के प्रयास करने होगे।

स्कूल खोलने को लेकर इस प्लान पर कार्य करेगी सरकार :-

जुलाई से हरियाणा प्रदेश सरकार स्कूल स्कूल खोलने के प्लान पर कार्य कर रही है जिसके तहत 10वीं 11वीं एवं 12वीं कक्षा के छात्रों की कक्षाएं जुलाई से शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। क्योंकि इन कक्षाओं के छात्र ना केवल समझदार है बल्कि अपना ख्याल रख पाने में भी सक्षम हैं।

सभी सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को दो पारियों में खोले जाने पर विचार किया जा रहा है, जिसके चलते 50 फ़ीसदी बच्चे पहली पारी में और बाकी 50 फ़ीसदी बच्चे दूसरी पारी में स्कूल आएंगे। उसके बाद भी यदि स्कूल खोले जाने में कोई समस्या आती है तो उसका निवारण सरकार उचित योजना बनाकर करेगी।

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