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फरीदाबाद की अभिषिका बनी यंगेस्ट प्लाज्मा डोनर, ईएसआई द्वारा किया गया सम्मानित

फरीदाबाद जिले में कोरोना संक्रमितों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और जिले में अब संक्रमितों की संख्या 5000 से भी अधिक हो चुकी है जिसमें से करीब 100 लोग अपनी जान गवा चुके हैं। लेकिन राहत कि बात यह है कि जिले में ठीक होने वाले मरीजों कि संख्या संक्रमित मरीजों से अधिक है।

फरीदाबाद में कोरोना के कुल मामलों में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या एक्टिव मामलों से ज्यादा है अर्थात फरीदाबाद में लोग तेजी से ठीक हो रहे हैं और इसी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए फरीदाबाद जिले में भी प्लाज्मा थेरेपी को उपयोग में लाया जा रहा है।

इंडियन मेडिकल काउंसिल की तरफ से फरीदाबाद के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज को प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना संक्रमितों का इलाज करने की अनुमति दे दी गई है। साथ ही   इस थेरेपी के जरिए अधिक मरीजों को स्वास्थ करने के लिए  फरीदाबाद के ई एस आई मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा बैंक भी बनाया जा रहा है।

बीते कुछ हफ्तों में देखने को मिला था कि प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग से कोरोना के मरीजों को अधिक तेजी से ठीक किया जा रहा है। कई ठीक हो चुके कोरोना संक्रमित अपना प्लाज्मा डोनेट कर इस महामारी से अन्य मरीजों को बचाने का सराहनीय कार्य कर रहे है।

इसी कड़ी में फरीदाबाद कि 21 वर्षीय अभिषिका प्लाज्मा डोनेट कर फरीदाबाद की सबसे युवा प्लाज्मा डोनर बन गई है। अभिषिका द्वारा फरीदाबाद के ई एस आई मेडिकल कॉलेज में अन्य संक्रमितों के लिए अपना प्लाज्मा डोनेट किया गया है।

अभिषिका ने इस सारहानिय कार्य के लिए ई एस आई मेडिकल कॉलेज द्वारा अभिषिका को सम्मानित भी किया गया और उसके लिए ट्वीट कर कहां गया कि कुछ सुपर हीरो ऐसे होते है जो कैप्स नहीं पहनते है।

क्या होती है प्लाज्मा थेरेपी:-

विशेषज्ञों का कहना है कि इस थेरेपी के उपयोग से कोरोना के मरीजों में इस वायरस से लड़ने की क्षमता में विकास होता है। व्यक्ति के खून में आरबीसी वह प्लाज्मा होता है इस वायरस से ठीक हो चुके व्यक्ति के प्लाज्मा के अंदर एंटीबॉडी होती है। अगर कोई व्यक्ति संक्रमण से मुक्त हो जाता है और उसका प्लाज्मा दूसरे व्यक्ति को दिया जाए तो संक्रमित के ठीक होने की उम्मीदें अधिक बढ़ जाती है इसलिए इस थेरेपी को कोरोना संक्रमित के लिए संजीवनी भी कहा जा रहा है।

कैसे होगा प्लाज्मा थेरेपी से इलाज:-

संक्रमित व्यक्ति के स्वस्थ होने के 14 दिन बाद पूरी तरह एंटी बॉडी विकसित हो जाती है और उसका शरीर प्लाज्मा डोनेट के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है। एक व्यक्ति के शरीर से 400 एमएल प्लाज्मा लिया जा सकता है, जिसे दो संक्रमितों को चढ़ाया जा सकता है। इस थेरेपी की अनुमति मिलने के बाद अब ईएसआईसी की तरफ से ठीक हो चुके लोगों को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि दूसरे लोगों का इलाज किया जा सके।

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