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नपेंगे कई अधिकारी अब एक साथ, हरियाणा सरकार करेगी ऐसा वार

देश समेत अब तो प्रदेश में भी सरकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। हर विषय में यह अधिकारी अपना फायदा तलाशते हैं। प्रदेश की बात करें तो, सीएम मनोहर लाल की दखल के बाद से बिजली चोरी के खिलाफ चलाए अभियान से उपभोक्ताओं के साथ-साथ निगम अधिकारियों में खलबली मची हुई है। अधिकारीयों की नींद उड़ गई है।

इन अधिकारीयों पर भरोसा करना अब काफी कठिन लगता है। यह कठिनाई आम जनता की अपेक्षाओं को क्षति पहुंचा रही है। सरकार के इस अभियान के दौरान मात्र दो दिन में प्रदेश में बिजली चोरी के 2733 मामले पकड़े गए और करीब 11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया । 

बिजली चोरी के मामले में हरियाणा लगातार देश में बदनाम हो रहा है। बहुत वारदातें यहां बिजली चोरी की सुनने को मिल जाती हैं। बिजलीचोरी के लिए बदनाम हरियाणा में सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी पीछे नहीं है। जांच के दौरान यह बातें सामने आई कि उद्योगों के सात घरों में बिजली निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से चोरी कराई जा रही थी।

यह किसी देशद्रोह से कम अपराध नहीं है कि अपने लाभ के लिए आम जनता के पैसों से बन रही बिजली की सुविधाएँ किसी और को मिले जो हकदार ही नहीं। जो अवैध है। यह भी इनपुट मिला है कि कुछ अधिकारियों ने तो छापे के दौरान ही संबंधित व्यापारियों को फोन कर इसकी सूचना भी दी थी। इस मामले को लेकर विस्तृत जांच में बिजली निगम के कई अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल पाया गया है।

सांप को दूध पीला लिया होता इस से अच्छा ऐसा हरियाणा सरकार की सोच शायद इस मामले में होनी चाहिए। ऐसे मामलों में कुछ अधिकारीयों की वजह से प्रदेश और सरकार दोनों का ही नाम खराब होता है।

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