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“वो तो वफ़ा निभाते हैं हम ही दगा करते हैं”,बेजुबान पर हुआ फिर अत्याचार

फरीदाबाद : केरल से एक ऐसी खबर आ ही है जिसको सुन कर आपका भी दिल कांप जाएगा | केरल के मलप्पुरम में एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा पटाखे से भरे एक अनानास को कथित तौर पर खिलाए जाने के बाद एक गर्भवती हथिनी की मौत हो गई । इंसानियत पर सवाल उठना वाजिब है एक बेज़ुबान को पटाखे भरा अनानास खिलाना किसी हैवान का काम ही हो सकता है | यह घटना 27 मई को हुई जब गर्भवती हथिनी पानी में खड़ी थी और वहीँ खड़े-खड़े उसकी मौत हो गई |

कभी सोचा है आपने अगर आपके खाने में कोई नुकीली चीज़ डालदे ? या खाने में कील निकले | सोच कर ही आत्मा दो पलों के लिए थम गई हैना? लेकिन उस बेज़ुबान को पटाखे भरा अनानास खिलाना शायद खेल समझा होगा किसी ने | हम तो अपना ऐतराज़ अपना गुस्सा शब्दों में बयान कर देंगे उस व्यक्ति के खिलाफ जिसने हमारे भोजन के साथ ऐसा किया हो | परंतु कभी आपने सोचा है कि अगर आप बेज़ुबान होते और आपके खाने में कोई कील डाल देता तो आप क्या करते अपने हाथों का उपयोग करके उस व्यक्ति को मारते लिखित में शिकायत दर्ज करवाते ? शायद यही करते | एक बेज़ुबान जानवर के खाने में बहुत से व्यक्ति अपने सुख के लिए उनके भोजन में अनेक किस्म के पदार्थ डाल देते हैं यह तो पुरानी बात है लेकिन पटाखा भी कोई किसी बेज़ुबान को खिला सकता है यह काफी गंभीर मामला है |

उस बेज़ुबान में और आप में एक चीज़ सामान है कोई अंतर नहीं उस चीज़ में वो है रूह शायद वह बेज़ुबान अपनी रूह से यही कहेगा कि जिस ने भी ऐसा किया वह कभी खुश न रहे | रूह से निकली बदुआ अक्सर पहाड़ों को भी डहा देती है | बेज़ुबानों को इंसान का सबसे ख़ास मित्र बताया गया है | अनेक लोग ऐसे भी हैं जो एक बेज़ुबान जानवर को अच्छी ज़िन्दगी देने के लिए उनको गोद लेते हैं उन्हें पालते हैं |

इस घटना की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है | मामला सबके सामने में तब आया जब केरल के एक अधिकारी ने इस मामले की जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट की | भूखी गर्भवती हथिनी खाने की तलाश में जंगल से भटक कर रिहायशी इलाके में पहुंच गई थी | जब हथिनी सड़क पर टहल रही थी, तभी किसी ने उसे दिवाली में जलाए जाने वाले पटाखे और अनार भरा हुआ अनानास खिला दिया | भूखी गर्भवती हथिनी ने जब पटाखे से भरा अनानास खाया तो वह वेल्लियार नदी तक गई और पानी में खड़ी हो गई | हथिनी बहुत देर तक मुंह और सूंड को पानी में डुबोकर खड़ी रही ताकि उसे दर्दनाक पीड़ा से कुछ राहत मिल सके |

ओम सेठी

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