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ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के कारण 5 मरीजों की मौत, सीएम का जवाब मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी नही

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प्रदेश में  वायरस के संक्रमण के कारण हुई मौतों का आंकड़ा काफी अधिक है। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हुई मौतों का कारण कोरोना के साथ ऑक्सीजन की कमी को भी बताया जा रहा है। ज्ञात है कि कोरोना की दूसरी लहर के समय प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से हाहाकार मच गया था। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मानसून सत्र के पहले ही दिन कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हुई मौतों का कारण ऑक्सीजन की कमी नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रदेश में 24 मार्च 2020 से 31 जुलाई 2021 के बीच कुल 9635 मरीजों की मौत हुई, लेकिन इन सभी में से कोई भी मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई थी। बता दें 25 अप्रैल की रात हिसार के सोनी बर्न अस्पताल में 5 मरीजों की मौत हुई थी। प्रशासन द्वारा की गई जांच में इसके लिए निजी अस्पताल को दोषी ठहराया गया है।

ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के कारण 5 मरीजों की मौत, सीएम का जवाब मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी नही

बताया गया कि अस्पताल में संसाधनों की कमी के बावजूद अधिक मात्रा में मरीजों को दाखिल कराया गया था। अस्पताल के पास मरीजों के मुकाबले प्रयाप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं थे।जांच रिपोर्ट में पाया गया कि हिसार व आसपास के अन्य जिलों में ऑक्सीजन को सप्लाई करने वाला गुप्ता ऑक्सीजन प्लांट घटना की रात को 12 बजे से सुबह 4 बजे तक बंद था।

तकनीकी खराबी के प्लांट बंद होने से सप्लाई पूरी तरह से बंद थी। सुबह 4:00 बजे प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति हो पाई थी। इन्ही 4 घंटों के दौरान सोनी पल अस्पताल में मरीजों की मौत हुई थी। बरवाला के गांव खान बहादुर वासी राजेश्वर सिंह, पंजाब के मानसा वासी अरविंद शर्मा, उकलाना वासी राजाराम, दिल्ली नांगलोई वासी अनिल कुमार, आदमपुर के भाड़ा गांव निवासी सतेंद्र सिंह की मौत सोनी बन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई थी।

ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के कारण 5 मरीजों की मौत, सीएम का जवाब मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी नही

गुप्ता ऑक्सीजन प्लांट के सीइओ आनंद गुप्ता ने बताया कि प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी, केवल कंप्रेशन से ही ऑक्सीजन गैस को तैयार करके सिलेंडर पर जा रहे थे। बता दें कि गैस सिलेंडरों को 2 तरीकों से रिफिल किया जा रहा था। एक तरीका लिक्विड ऑक्सीजन से सिलेंडर भरने का है तथा दूसरे तरीके में कंप्रेशन से गैस तैयार करके सिलेंडर भरे जाते हैं।

घटना वाली रात करीब 12:00 बजे तकनीकी खराबी के कारण प्लांट को 4 घंटो तक बंद करना पड़ा था। लिक्विड ऑक्सीजन का टैंकर पानीपत से 25 अप्रैल की रात को 11: 51 पर पानीपत से हिसार के लिए रवाना हुआ था, जबकि 26 अप्रैल को सुबह 4:00 बजे वह पहुंचा था। टैंकर पहुंचने के बाद ही ऑक्सीजन की आपूर्ति हो पाई थी।

ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के कारण 5 मरीजों की मौत, सीएम का जवाब मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी नही

सोनी पल अस्पताल के संचालक डॉ सोनी नए घटना की रात को हिसार प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुप डीसीएचसी में मैसेज कर के बताया था कि अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने वाली है तथा इस कारण 5 मरीजों की जान भी जा सकती है। उसने बताया कि उसने अपने ड्राइवर को ऑक्शन लाने के लिए भेजा है लेकिन किसी भी प्लांट या अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है।

रात में करीब 3:00 बजे डॉक्टर सोनी ने इस बारे में ग्रुप में मैसेज भी किया। अन्य कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने भी प्लांट पर अवश्य ना मिलने के बारे में मैसेज किया। सीएमओ डॉ रत्ना भारती ने इस बारे में जवाब देते हुए बताया कि उन्होंने हालात को चेक करने के लिए वहां टीम भेजी है। अस्पताल में गैस का सिलेंडर सुबह 6:00 बजे पहुंचा, लेकिन तब तक 5 मरीजों की मौत हो चुकी थी।

ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के कारण 5 मरीजों की मौत, सीएम का जवाब मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी नही

नेगलिजेंसी बोर्ड व एसडीएम द्वारा की गई जांच में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के लिए सोनी बर्न अस्पताल को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट में पाया गया कि अस्पताल में केवल 20 ऑक्सीजन सिलेंडर थे, जबकि अस्पताल कोरोना के कुल 15 मरीजों को भर्ती कराया गया था। इन कुल 15 कोरोना मरीजों में से साथ वेंटिलेटर पर थे। प्रतिदिन इतने मरीजों के लिए लवर से ज्यादा सिलेंडरों की आवश्यकता होती थी और दिन में इन्हें कम से कम 5 बार फिर करवाया जा रहा था।

लेकिन तकनीकी खराबी के कारण ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के कारण कुछ समय तक आपूर्ति बाधित रही, जिस कारण से अस्पताल में यह घटना हुई। यदि मरीजों की संख्या के अनुसार ही अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में होते तो यह नहीं होती। अस्पताल प्रशासन द्वारा संसाधनों के मुकाबले अधिक मरीजों को भर्ती क्या हुआ था। जिले के एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार ऑक्सीजन खर्च को 5 गुना तक बढ़ा तो दिया गया था लेकिन उनके प्रबंध नहीं किए हुए थे, जिस कारण मरीजों की मौत हुई। वर्तमान में यह मामला मानवाधिकार आयोग के पास यह तथा कार्रवाई से पहले मामले पर विचार किया जा रह है।

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