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संगीत दिवस :संगीत एक धुन नहीं हमारा एहसास हैं, जानें इस खास दिवस का इतिहास और महत्व

सूनी सड़कों पर खूबसूरत हरियाली के समान है संगीत | संगीत मात्र एक धुन नहीं लेखक की सोच है, हमारे एहसास हैं, दुनिया की बातें हैं | संगीत एक ऐसी दवा है जो हर मूड में काम कर जाती है | सोशल मीडिया हो या असल ज़िंदगी जब भी कोई दिल टूट ता है तो आशिक सबसे पहले बेवफाई का गीत चलाएगा, कोई खुश है वो ख़ुशी भरे संगीत सुनेगा, यदि किसी का जन्मदिन है तो वह, “बार-बार यह दिन आए तुम जिओ हज़ारों साल” जैसे विख्यात गाने सुनेगा | संगीत से हर किसी का मूड बदल जाता है | संगीत किसी के जीवन में साधन तो किसी केजीवन में साधना समान है । किसी के लिए आनंद तो किसी के लिए पूरा जीवन। कठिन समय में किसी के लिए जीने का हौसला तो बुरे दौर में किसी की ताकत और राहत।

अपने राज्य हरियाणा के संगीत की बात करें तो हर कोई इस से परिचित होगा | अंतरराष्ट्रीय लेवल पर हरियाणवी संगीत को सुना जाने लगा है | रागिनी हो या लोकगीत यह हर एक हरियाणवी के दिल में बस्ता है | हरियाणा के लोक संगीत के दो मुख्य रूप हैं, हरियाणा का शास्त्रीय लोक संगीत और हरियाणा का देसी लोक संगीत (हरियाणा का देशी संगीत)। यह प्रेमियों, वीरता, शौर्य, फसल की खुशी और वेदनाओं का रूप लेते हैं। हरियाणा संगीत परंपरा में समृद्ध है और यहां तक कि स्थानों को रागों के नाम पर रखा गया है, उदाहरण के लिए चरखी दादरी जिले में नंद्यम, सारंगपुर, बिलावला, बृंदाबाना, टोडी, असावरी, जायसरी, मलकोशा, हिंडोला, भैरवी और गोपी कल्याण नाम के कई गांव हैं जो रागों के उपर रखे गए हैं।

हरियाणा का देसी / देशी संगीत – हरियाणवी संगीत का देश-पक्ष या देसी (देशी) रूप राग भैरवी, राग भैरव, राग काफी, राग जयजयवंती, राग झिंझोटी और राग पहाड़ी पर आधारित है और मौसमी गीत, गाथागीत, समारोहिक गीत गाने के लिए समुदाय के लोगों को मनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इत्यादि और यह संबंधित धार्मिक पौराणिक कथाएँ जैसे पुराण भगत से भी संबंध रखता है |

रास लीला और “रागिनी” लोक नाट्य प्रदर्शन हरियाणवी हैं। रंगमंच का रागिनी रूप लख्मी चंद द्वारा लोकप्रिय हुआ था। गायन सामाजिक भिन्नताओं को ध्वस्त करने का एक शानदार तरीका है क्योंकि लोक गायकों को बहुत सम्मानित किया जाता है और उन्हें घटनाओं, समारोहों और विशेष अवसरों के लिए आमंत्रित किया जाता है, भले ही जाति या स्थिति की परवाह किए बिना। गीत दिन-प्रतिदिन के विषयों पर आधारित होते हैं और गुनगुनाते हुए हास्य गीतों की अनुभूति को दर्शाते हैं। हरियाणवी नृत्यों में तेज ऊर्जावान आंदोलन हैं, और लोकप्रिय नृत्य रूप हैं खोरिया, चौपाइया, लूर, बीन, घूमर, धमाल, फाग, सावन और गुग्गा। लूर, जिसका अर्थ है कि हरियाणा के बांगर क्षेत्र में लड़की, होली त्योहार के दौरान फाल्गुन (वसंत) के महीने में पारंपरिक हरियाणवी पोशाक में लड़कियों द्वारा प्रश्न और उत्तर प्रारूप के रूप में प्रदर्शन किया जाता है, ताकि सुखद मौसम और बुवाई का आगमन हो सके।

हरियाणवी संगीत उपकरण – किसी भी प्प्रांत या देश के संगीत को उसके उपकरण यानि इंस्ट्रूमेंट्स अलग बनाते हैं | हरियाणवी संगीत में ज़्यादातर उपयोग होने वाले उपकरण यह हैं | सारंगी, हारमोनियम, चिमटा, धडक, ढोलक, मंजीरा, खरताल, डमरू, डुग्गी, डैफ, बंसुरी, बीन, घुंघरू, ढाक, घरहा, थाली, शंख, बांसुरी, बीन, इकतारा और शहनाई |

जिला फरीदाबाद की बात करें तो, फरीदाबाद ने हरियाणा का ही नहीं देश का भी नाम रोशन किया है संगीत में अपने योगदान से | फरीदाबाद जिले में ही जन्में हैं सोनू निगम, ऋचा शर्मा और हिमानी कपूर जैसे विख्यात गायक | सोनू निगम हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध गायक हैँ। वे हिन्दी के अलावा कन्नड़, उड़िया, तमिल, असमिया, पंजाबी, बंगाली, मराठी और गंगा-जमुनामाता मंदिर अर्जुनी मोरगाव फ़िल्मों में भी गा चुके हैं। इन्होने बहुत से इन्डि-पॉप एलबम बनाए हैं और कुछ हिंदी फिल्मों में काम किया है | सोनू निगम और ऋचा शर्मा ऐसे नाम हैं, जिनकी आवाज़ में गाय गीत फिल्मों में सफलता की गारंटी माने जाते हैं | वहीं हिमानी कपूर ने साल 2005 में संगीत प्रतियोगिता सारेगामापा की फाइनलिस्ट बन के फिल्म जगत में प्रवेश किया |

विश्वभर के कई अलग-अलग स्थानों में 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है | आज विश्व संगीत दिवस है। चलिए जानते हैं कि विश्व संगीत दिवस की शुरुआत कैसे हुई, इसके पीछे का इतिहास क्या है और इस खास दिवस का क्या महत्व है। आपको जानकार अच्छा लगेगा कि आज सिर्फ संगीत दिवस ही नहीं बल्कि आज ही के दिन योग दिवस भी मनाया जाता है, और आज इस साल फादर्स डे भी है | योग की ही तरह संगीत भी एक साधना है। संगीत हमें इंसान को खुश रखता है। इंसान के मानसिक स्वास्थ्य के साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी ठीक रखता है। यह हमारे शरीर में हार्मोन का संतुलन बनाए रखता है। भागदौड़ भरी जिंदगी में संगीत हमें सुकून पहुंचाता है।

महामारी के इस दौर में छोटी-छोटी खुशियां इंसान के अंदर भरपूर ऊर्जा डाल रही हैं | संगीत को हम सदियों तक याद कर लेते हैं | विद्यार्थियों को भले ही परीक्षा में जवाब याद आए न आए लेकिन उसको सैकड़ों गानें ज़रूर याद रहते हैं, यही कारण है कि बहुत सी बार तो विद्यार्थी परीक्षा में भी गाने लिख कर आ जाते हैं | खैर संगीत दिवस की की शुरुआत वर्ष 1982 में फ्रांस में हुई थी जिसका श्रेय तात्कालिक सांस्कृतिक मंत्री जैक लो को जाता है दरअसल फ्रांस का हर दूसरा व्यक्ति संगीत से किसी-न-किसी रूप में जुड़ा हुआ है, चाहे वह गाता हो या कोई वाद्य बजाता हो, संगीत चाहे शास्त्रीय हो या सुगम, देशी हो या विदेशी।संगीत दिवस को दुनिया में फेटे डी ला म्यूजिक (Fête de la Musique) के नाम से भी जाना जाता है।

फ्रांस के लोगों का संगीत के लिए प्यार देखते हुए 21 जून 1982 को आधिकारिक रूप से संगीत-दिवस की घोषणा हुई थी | धीरे-धीरे यह अब पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा है। फ्रांस में यह उत्सव न केवल 21 जून को मनाया जाता है बल्कि कई शहरों में तो एक महीने दिन पहले तक से शुरू हो जाता है। हर रोज़ नए-नए कार्यक्रम होते हैं, म्यूज़िक-रिलीज़, सी डी लॉन्चिंग, कोंसर्ट इत्यादि और 3 दिन पहले से तो न सिर्फ सारे सभागृह बल्कि सड़कें तक आरक्षित हो जाती हैं। इस खास दिवस पर दुनियाभर के बड़े कलाकार कार्यक्रम प्रस्तुत करते और गाना गाने या परफॉर्म करने के पैसे नहीं लेते। इस खास दिवस पर दुनिया भर में संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। 

ऐसा कहा जाता है कि पहले संगीत दिवस के अवसर पर फ्रांस के साथ 32 से ज्यादा देश शामिल थे। इन देशों में अलग-अलग जगहों पर संगीत के कार्यक्रम आयोजित हुए और पूरी रात लोगों ने जश्न मनाया। शुरुआत में कुछ ही देशों ने संगीत दिवस मनाया था लेकिन बाद में संगीत के लिए एक खास दिन तय करने के लिए कई देश आगे आए और इस तरह दुनियाभर के बहुत सारे देशों में 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाने लगा। 

कुछ तो बात होगी उसकी आँखों में मेरे दोस्त यूँ ही थोड़ा उसकी याद गानों में आने लगती है | संगीत को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता | भारत में अलग अलग प्रकार के संगीत हमें देखने हो मिलते हैं | राजस्थानी हो या गुजराती, हरियाणवी हो या पंजाबी यह सभी संगीत लोगों के दिलों में गुन-गुन होते रहते हैं | वतन हमारा है, संगीत हमारा है ईश्वर सभी का एक है इसी सोच के साथ अगर हम जीवन को जिएं तो कोई भी ताकत भारत की और नज़रे उठा कर नहीं देख सकती |

  • Written By Om Sethi

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